भारत और ओमान ने अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को 1 जून 2026 से लागू कर दिया है। इस समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं पैदा हुई हैं।
यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सेवाओं, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था और पेशेवर सहयोग को भी शामिल किया गया है। इससे भारतीय कंपनियों को ओमान में निवेश बढ़ाने और नए व्यवसाय स्थापित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए भी नए अवसर उपलब्ध होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई मायनों में लाभदायक साबित होगा। ओमान के बाजार में आसान पहुंच मिलने से भारतीय उद्योगों का निर्यात बढ़ेगा और घरेलू स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
ओमान ने भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार को बड़े पैमाने पर खोल दिया है, जिससे कृषि, फार्मा, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। इसके अलावा ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स और उर्वरक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी।
भारत और ओमान के नेताओं ने इस समझौते को दोनों देशों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति बताया है। उनका कहना है कि CEPA आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


