देहरादून में आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 1975 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक दुखद और काला दौर बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक अधिकारों को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा था। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी शक्ति संविधान तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में निहित है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के समय देश में नागरिक स्वतंत्रताओं पर अंकुश लगाया गया, विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया और प्रेस की स्वतंत्रता को सीमित कर दिया गया था। यह कालखंड लोकतांत्रिक इतिहास का ऐसा अध्याय है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
धामी ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के साहस और संघर्ष के कारण ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पुनः स्थापित हो सकी। उन्होंने युवाओं को संविधान के मूल सिद्धांतों, नागरिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी पालन करें।
कार्यक्रम में आपातकाल से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हुए आंदोलनों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और संविधान की गरिमा को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सतर्क और जागरूक रहने का भी संदेश देता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का लोकतंत्र भविष्य में और अधिक मजबूत होगा तथा संविधान देश को प्रगति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाता रहेगा।


