भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक स्थिरता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी रणनीति के तहत RBI ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है और मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है।
केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, ऊंची कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता भारत की आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं। इसी वजह से FY27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है।
RBI ने साथ ही विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए कई नए कदमों की घोषणा की है। इन उपायों के तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश के लिए अधिक आकर्षक अवसर दिए जाएंगे। इन प्रयासों का उद्देश्य रुपये को स्थिरता प्रदान करना और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह नीति भारत को बाहरी आर्थिक झटकों से बचाने और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है।


