
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से नाम हटना और नागरिकता समाप्त होना दो अलग-अलग बातें हैं। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग केवल मतदाता सूची तैयार करने और संशोधित करने का अधिकार रखता है, जबकि नागरिकता का अंतिम निर्धारण केंद्र सरकार करती है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि बिहार SIR मामले में भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता संदिग्ध लगती है तो चुनाव आयोग को मामला नागरिकता अधिनियम के तहत केंद्र सरकार को भेजना होगा।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि SIR के तहत मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की लगभग 34 लाख अपीलें अभी भी लंबित हैं। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि अब तक जिन मामलों का फैसला आया है, उनमें करीब 70 प्रतिशत अपीलकर्ताओं के पक्ष में निर्णय दिया गया है।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि कुछ लोगों को मतदाता सूची से नाम हटने के बाद राशन, अन्नपूर्णा योजना और जाति प्रमाण पत्र जैसी सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। इस पर अदालत ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार नागरिकता पर अंतिम निर्णय नहीं लेती, तब तक केवल मतदाता सूची से नाम हटना किसी भी व्यक्ति की नागरिकता समाप्त होने का आधार नहीं बन सकता।

