अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद ने वैश्विक बाजारों का ध्यान खींचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका 3 नवंबर के मिडटर्म चुनावों से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच बातचीत को सकारात्मक बताया। इस बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई, हालांकि मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण बाजार में जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
तेल की कीमतें भारत के लिए क्यों अहम हैं?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव घट सकता है। शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 103.53 डॉलर और WTI करीब 90.97 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कीमतों में यह नरमी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है, लेकिन आगे का रुख भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।
रुपये में सुधार की खबर
डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। 9 अक्टूबर को रुपया 96.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। रुपये को संभालने के लिए RBI के हस्तक्षेप की खबरें सामने आईं। तेल की कीमतें और विदेशी पूंजी का प्रवाह रुपये की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक हैं।
TCS के नतीजों में मुनाफे की बढ़त
आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी TCS ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 13,884 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 12,075 करोड़ रुपये था। कंपनी का राजस्व भी सालाना आधार पर बढ़ा। TCS ने 12 रुपये प्रति शेयर का दूसरा अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है।
निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि अच्छे तिमाही नतीजों के बावजूद किसी शेयर का भाव बाजार की उम्मीदों, कंपनी के भविष्य के अनुमान और व्यापक आर्थिक स्थितियों से प्रभावित होता है।


