भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई के बढ़ते जोखिम को देखते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। इसके बाद रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर 2026 को मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी दी। फरवरी 2023 के बाद यह पहली रेपो रेट बढ़ोतरी है।
इस फैसले से होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर असर पड़ सकता है। खासकर रेपो रेट से जुड़ी फ्लोटिंग ब्याज दर वाले कर्ज की दरों में बदलाव होने पर EMI बढ़ सकती है या लोन चुकाने की अवधि में बदलाव हो सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर बैंक और लोन की शर्तों पर निर्भर करेगा।
रेपो रेट बढ़ने से महंगाई पर कैसे लग सकती है लगाम?
रेपो रेट वह दर है, जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक धन उपलब्ध कराता है। इस दर में बढ़ोतरी होने पर बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो सकता है। बैंक भी इसकी भरपाई के लिए ग्राहकों को दिए जाने वाले कुछ कर्ज की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।
जब कर्ज महंगा होता है, तो लोग और कंपनियां नया कर्ज लेने या खर्च बढ़ाने से पहले सोचते हैं। इससे बाजार में मांग पर दबाव कम हो सकता है और महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, खाद्य पदार्थों या कच्चे तेल की कीमतों जैसे कारकों पर ब्याज दरों का असर सीमित या अप्रत्यक्ष हो सकता है।
महंगाई का अनुमान बढ़ा, GDP को लेकर RBI आशावादी
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। वहीं, इसी अवधि के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया गया है। यानी केंद्रीय बैंक के सामने महंगाई को नियंत्रित करने की चुनौती है, लेकिन उसे आर्थिक वृद्धि मजबूत बने रहने की भी उम्मीद है।
आगे क्या हो सकता है?
RBI ने मौद्रिक नीति का रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। यह संकेत है कि महंगाई के जोखिम को देखते हुए भविष्य में नीति को जरूरत के मुताबिक सख्त रखा जा सकता है। लेकिन आगे रेपो रेट बढ़ेगा या स्थिर रहेगा, इसका फैसला आने वाले आर्थिक आंकड़ों और परिस्थितियों के आधार पर होगा।


