अगर आप ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने के लिए खाने में नमक कम कर रहे हैं, लेकिन बाकी जीवनशैली पर ध्यान नहीं दे रहे, तो अपनी दिनचर्या की समीक्षा करना जरूरी है। उच्च रक्तचाप के पीछे केवल नमक ही जिम्मेदार नहीं होता। नींद की कमी, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा, शराब का अधिक सेवन और कुछ दवाएं भी इसके जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।
नींद की अनदेखी पड़ सकती है भारी
पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद हृदय स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। लगातार नींद पूरी न होने या नींद के दौरान सांस रुकने जैसी समस्या होने पर ब्लड प्रेशर से जुड़ा जोखिम बढ़ सकता है। यदि सोते समय तेज खर्राटे आते हैं और दिन में बहुत नींद महसूस होती है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
तनाव भी बन सकता है वजह
तनाव के दौरान शरीर की प्रतिक्रिया के कारण ब्लड प्रेशर कुछ समय के लिए बढ़ सकता है। तनाव को संभालने के लिए नियमित व्यायाम, आराम की गतिविधियां और पर्याप्त नींद मददगार हो सकती हैं। हालांकि, लंबे समय के तनाव और लगातार उच्च रक्तचाप के बीच संबंध जटिल है।
बैठे रहने की आदत बदलें
लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। दिनभर में थोड़ी-थोड़ी देर चलना, नियमित पैदल चलना और अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि करना बेहतर विकल्प हैं।
चाय-कॉफी और शराब पर रखें नजर
कैफीन कुछ लोगों में अस्थायी रूप से ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है। वहीं, शराब का अधिक सेवन उच्च रक्तचाप के जोखिम को बढ़ाता है। यदि आपको पहले से बीपी की समस्या है, तो कैफीन के सेवन और शराब से जुड़े विकल्पों पर डॉक्टर से चर्चा करें।
दवाओं का भी हो सकता है असर
कुछ दर्द निवारक, सर्दी-जुकाम की दवाएं और अन्य औषधियां ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती हैं। यदि दवा लेने के बाद बीपी बढ़ने की समस्या दिखाई देती है, तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें। अपनी मर्जी से दवा बंद करना सही नहीं है।
ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने के लिए नमक कम करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ स्वस्थ खानपान, नियमित गतिविधि, वजन प्रबंधन और रक्तचाप की निगरानी भी जरूरी है। यदि रीडिंग लगातार अधिक आ रही है, तो डॉक्टर से परामर्श करें।


