1 अप्रैल 2026 से शुरू हुई जनगणना इस बार कई मायनों में खास है। यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।
पहले चरण में घरों की गिनती, उनकी स्थिति, सुविधाएं और परिवार से जुड़ी बुनियादी जानकारी जुटाई जाएगी। खास बात यह है कि नागरिकों को self-enumeration का विकल्प भी दिया गया है, जिससे वे खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम न केवल प्रक्रिया को तेज बनाएगा, बल्कि डेटा की सटीकता भी बढ़ाएगा। जनगणना के आंकड़े सरकार के लिए नीतिगत फैसलों और विकास योजनाओं का आधार बनते हैं।


