रिटायरमेंट के बाद जमा पूंजी को लंबे समय तक चलाना एक बड़ी वित्तीय चुनौती होती है। एक ओर नियमित खर्चों के लिए पैसे की जरूरत होती है, वहीं दूसरी ओर महंगाई और मेडिकल इमरजेंसी के कारण भविष्य की जरूरतें बढ़ सकती हैं। यदि पूरा पैसा एक ही तरह के निवेश में रखा जाए, तो बाजार में गिरावट या अचानक खर्च आने पर परेशानी हो सकती है।
ऐसी स्थिति में तीन-बकेट स्ट्रेटजी रिटायरमेंट फंड को अलग-अलग समयावधि की जरूरतों के अनुसार व्यवस्थित करने का एक तरीका है।
पहला बकेट: रोजमर्रा और निकट भविष्य के खर्च
पहले बकेट में अगले कुछ समय के जरूरी खर्चों के लिए धन रखा जाता है। इसमें घर का खर्च, बिजली-पानी के बिल, दवाइयां और अन्य नियमित भुगतान शामिल हो सकते हैं। इस हिस्से का मुख्य उद्देश्य पैसा आसानी से उपलब्ध रखना और बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान जरूरी खर्चों के लिए निवेश बेचने की मजबूरी कम करना है।
दूसरा बकेट: मध्यम अवधि की जरूरतें
दूसरे बकेट में आने वाले वर्षों के खर्चों को ध्यान में रखकर निवेश की योजना बनाई जा सकती है। इस हिस्से में ऐसे विकल्प चुने जा सकते हैं जो व्यक्ति की जोखिम क्षमता, पैसे की जरूरत के समय और पूंजी की सुरक्षा के लक्ष्य के अनुरूप हों।
तीसरा बकेट: लंबी अवधि की वित्तीय जरूरतें
तीसरे बकेट का उद्देश्य लंबी अवधि की जरूरतों और महंगाई के प्रभाव को ध्यान में रखना है। रिटायरमेंट के बाद यदि जीवनकाल अपेक्षा से अधिक लंबा होता है, तो निवेश को भी लंबे समय तक चलने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए इस हिस्से में निवेश का चयन समयावधि और जोखिम सहने की क्षमता को देखकर करना चाहिए।
15 और 20 साल की जरूरतों का हिसाब जरूरी
रिटायरमेंट की योजना बनाते समय केवल शुरुआती वर्षों के खर्च का अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना चाहिए कि 15, 20 या उससे अधिक वर्षों के बाद कितनी रकम की जरूरत पड़ सकती है। महंगाई के कारण भविष्य में समान वस्तुओं और सेवाओं पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
तीन-बकेट स्ट्रेटजी में रकम का बंटवारा सभी के लिए समान नहीं होता। यह व्यक्ति की पेंशन, अन्य नियमित आय, कुल कॉर्पस, स्वास्थ्य, खर्च और निवेश संबंधी प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है।
इसलिए निवेश का बंटवारा तय करने से पहले अपनी जरूरतों का आकलन करें और समय-समय पर योजना की समीक्षा करते रहें।


