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इंडिगो संकट का आठवां दिन: गलत प्लानिंग, पायलट कमी और FDTL नियमों के बीच 5,000 उड़ानें रद्द—हालात कब सुधरेंगे?

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo पिछले आठ दिनों से एक अभूतपूर्व संचालन संकट का सामना कर रही है। आज भी 400+ उड़ानें रद्द होने के साथ कुल कैंसिलेशन 5,000 के करीब पहुंच चुका है। इस संकट ने न सिर्फ यात्रियों को परेशान किया बल्कि संसद में भी सरकार को जवाब देना पड़ा।

संकट का मूल—FDTL Phase-2 नियम

नवंबर से लागू हुए Flight Duty Time Limitations (FDTL) Phase-2 के तहत पायलटों की नाइट-ड्यूटी, आराम और रोस्टरिंग को लेकर नए प्रावधान लागू हुए।
IndiGo इन नियमों से पहले ही पायलटों की कमी झेल रहा था, और नए बदलावों ने उसकी क्षमता पर अचानक भारी दबाव डाल दिया।

क्या IndiGo ने चेतावनी दी थी?

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन Naidu ने बताया कि 1 दिसंबर की महत्वपूर्ण बैठक में IndiGo ने संभावित संकट की कोई चेतावनी नहीं दी—और अगले ही दिन बड़े पैमाने पर कैंसिलेशन शुरू हो गए।
मंत्री के अनुसार, यह “एयरलाइन की आंतरिक विफलता” है।

प्रभाव—देश के बड़े एयरपोर्ट ठप

आज के रद्दीकरण का पैटर्न बताता है कि सबसे अधिक प्रभाव प्रमुख महानगरों पर पड़ा:

  • दिल्ली – 152

  • बेंगलुरु – 121

  • हैदराबाद – 58

  • चेन्नई – 41

इसके चलते हजारों यात्री हवाई अड्डों पर फंसे रहे, होटल-शिफ्टिंग और टिकट-रिशेड्यूलिंग का भारी दबाव देखा गया।

सरकार का दखल—DGCA एक्शन

इंडिगो की क्षमता की समीक्षा के बाद DGCA ने

  • विंटर शेड्यूल में 5% कटौती,

  • रोस्टरिंग नियमों में अस्थायी ढील,

  • बैगेज और रिफंड प्रक्रियाओं पर तत्काल मॉनिटरिंग
    जैसे कदम उठाए हैं।

क्या हालात सुधर रहे हैं?

मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने मुंबई एयरपोर्ट पर निरीक्षण के बाद कहा:
“हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन सुधार में समय लगेगा।”

पीएम मोदी की चिंता

NDA संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि नियम जरूरी हैं, लेकिन यात्रियों को अनावश्यक परेशान करना गलत है।

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