धर्म/संस्कृति

मकर संक्रांति 2026: आज भी उत्सव, लेकिन ज्योतिष अनुसार पुण्यकाल 15 जनवरी को

भारत भर में मकर संक्रांति का पर्व पारंपरिक उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व न केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है बल्कि सूर्य उपासना और दान-पुण्य का भी विशेष महत्व रखता है। जगह-जगह पतंगबाजी, मेले, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

हालांकि, ज्योतिष और पंचांग के अनुसार इस बार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश देर से हो रहा है, इसलिए कई विद्वान 15 जनवरी 2026 को स्नान-दान और शुभ कार्यों के लिए अधिक उपयुक्त मान रहे हैं। इसी कारण कुछ श्रद्धालु आज पर्व मना रहे हैं और कुछ कल विशेष पूजा-अर्चना करने की तैयारी में हैं।

उत्तर भारत में इसे खिचड़ी, तिलकुट और गुड़ के पकवानों के साथ मनाया जा रहा है, वहीं महाराष्ट्र और गुजरात में पतंग उत्सव की रौनक दिखाई दे रही है। हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी जैसे तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है।

दक्षिण भारत में पोंगल पर्व के रूप में यह त्योहार चार दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें भोगी, सूर्य पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल शामिल हैं। घरों में नए चावल से पोंगल पकाया जाता है और सूर्य देव को अर्पित किया जाता है।

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