अमेरिका की व्यापार नीतियों के बीच कनाडा अपने निर्यात के लिए नए बाजार तलाश रहा है। इसी रणनीति के तहत भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को इस साल के अंत तक पूरा करने की कोशिशें तेज की गई हैं। कनाडा ने 30 साल से अधिक समय बाद करीब 300 सदस्यों वाला अपना सबसे बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत भेजा है।
कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल 12 से 17 अक्टूबर तक भारत में कारोबारी बैठकों में हिस्सा ले रहा है। इस दौरे का मकसद भारतीय बाजार में कनाडाई कंपनियों के लिए नए अवसर तलाशना और दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देना है।
व्यापार के लिए नए बाजारों पर जोर
अमेरिका लंबे समय से कनाडा का प्रमुख व्यापारिक साझेदार रहा है। लेकिन अमेरिकी टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों के कारण कनाडा अपने व्यापारिक संबंधों में विविधता लाने पर जोर दे रहा है। कनाडा की सरकार ने अमेरिका के बाहर के बाजारों में निर्यात बढ़ाने और भारत के साथ आर्थिक सहयोग मजबूत करने को प्राथमिकता दी है।
भारत कनाडा के लिए एक बड़ा उपभोक्ता बाजार होने के साथ-साथ सेवाओं, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में भी कारोबारी संभावनाएं रखता है। वहीं, कनाडा से भारत को कृषि उत्पादों, ऊर्जा और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति के अवसर मिल सकते हैं।
साल के अंत तक CEPA का लक्ष्य
दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत आगे बढ़ाने और 2026 के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। कनाडा के आधिकारिक बयान के अनुसार, सितंबर 2026 तक इस समझौते के लिए चार दौर की वार्ता पूरी हो चुकी थी।
2025 में भारत-कनाडा के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 30.4 अरब डॉलर था। कनाडा इसे 2030 तक बढ़ाकर 70 अरब डॉलर सालाना करना चाहता है। हालांकि, समझौते का अंतिम रूप दोनों पक्षों के बीच बातचीत और सहमति पर निर्भर करेगा।


