‘मेरी बेटियों का भविष्य…’, सौरभ हत्याकांड में सजा से पहले मुस्कान ने मांगी रहम की भीख

NITC Desk
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मेरठ। सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। सजा पर सुनवाई के दौरान मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों के भविष्य का हवाला देते हुए अदालत से नरमी बरतने की अपील की। बचाव पक्ष ने भी पारिवारिक परिस्थितियों और मुस्कान के माता-पिता का उल्लेख करते हुए सजा कम करने की दलील दी।

मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में पुलिस की जांच से लेकर अदालत के फैसले तक लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। मामले में पुलिस ने 54 दिन की जांच के बाद लगभग 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमे के दौरान 22 गवाहों के बयान दर्ज हुए और 126 बार सुनवाई हुई।

45 मिनट तक चली दोनों पक्षों की बहस

सजा के सवाल पर अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में अपनी-अपनी दलीलें रखीं। दोनों पक्षों के बीच करीब 45 मिनट तक बहस हुई। बचाव पक्ष ने मुस्कान की दोनों बेटियों के भविष्य और उसके माता-पिता की परिस्थितियों का हवाला देकर नरमी की मांग की।

अभियोजन पक्ष ने इसके विपरीत मामले की गंभीरता और प्रस्तुत साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए कड़ी सजा देने की मांग की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाया।

30 सितंबर को दोषी ठहराए गए थे दोनों

अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद सजा पर फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई।

इस मामले में कुल 126 सुनवाई हुईं और अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए। पुलिस ने जांच के बाद करीब 1,000 पन्नों का आरोप-पत्र दाखिल किया था।

14 अक्टूबर को सुनाए गए फैसले के साथ मामले में सजा का चरण पूरा हुआ। मृत्युदंड के मामलों में दोषियों को कानून के तहत अपील और अन्य निर्धारित न्यायिक उपायों का अधिकार रहता है।

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