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पायलट्स को श्रम कानून की सुरक्षा मिलेगी, दिल्ली हाईकोर्ट ने सैलरी और पद को बताया गैर-जरूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने पायलट्स से जुड़े एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि एयरलाइन पायलट्स श्रम कानून के तहत ‘वर्कमैन’ हैं। कोर्ट ने साफ किया कि किसी पायलट की ऊंची सैलरी या उसका पद उसे श्रमिक कानूनों से बाहर नहीं कर सकता।

कोर्ट के अनुसार, पायलट्स का मुख्य कार्य विमान संचालन से जुड़ा होता है, जो पूरी तरह तकनीकी और ऑपरेशनल प्रकृति का है। वे नीतिगत फैसले नहीं लेते और न ही कंपनी का प्रबंधन करते हैं, इसलिए उन्हें Industrial Disputes Act के तहत मिलने वाले अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि कंपनियां केवल नाम या पद बदलकर कर्मचारियों को श्रम कानून से बाहर नहीं कर सकतीं। किसी भी कर्मचारी की वास्तविक भूमिका और जिम्मेदारियां ही उसके कानूनी दर्जे को तय करती हैं।

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