देहरादून में आयोजित वैश्विक आपदा प्रबंधन सम्मेलन 2025 में वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं का जमावड़ा, राज्य को मिला सुरक्षा तकनीक का बड़ा उपहार

देहरादून में विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन–2025 की शुरुआत 28 नवंबर को हुई। तीन दिनों तक चलने वाला यह कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर आपदा प्रबंधन की रणनीतियों और तकनीकी प्रगति का सबसे बड़ा मंच माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसमें 40+ देशों के विशेषज्ञ, आपदा वैज्ञानिक, ग्लोबल क्लाइमेट संस्थान और राष्ट्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।
सम्मेलन में हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता, चरम मौसम घटनाओं में बढ़ोतरी, भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों के जोखिम आकलन और शहरी आपदा तैयारी जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की जा रही है। उद्घाटन सत्र के दौरान ऐलान किया गया कि उत्तराखंड को नए डोप्लर रडार सिस्टम उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे भूकंप, बादल-फटने, भारी वर्षा और तेज बर्फबारी जैसी घटनाओं की अधिक सटीक भविष्यवाणी संभव होगी।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड एक आपदा-संवेदनशील राज्य है और इसे बेहतर तकनीक, प्रशिक्षण व आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम की अत्यधिक आवश्यकता है। यह सम्मेलन राज्य को आपदा-प्रबंधन की नई दिशा देने में मदद करेगा। पहले दिन आयोजित सत्रों में जलवायु परिवर्तन, हिमालयी पारिस्थितिकी, राहत-बचाव रणनीतियों, समुदाय आधारित जोखिम-प्रबंधन और ड्रोन-आधारित मॉनिटरिंग पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय संस्थान भी भाग ले रहे हैं, जिनका उद्देश्य है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा के जोखिम को कम करने के लिए बेहतर तकनीक साझा की जाए। तीन दिवसीय आयोजन में कई तकनीकी कार्यशालाएँ, प्रदर्शनी और शोध-पत्र प्रस्तुतियों का आयोजन भी हो रहा है।




