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CBSE का सख्त फैसला: अब रट्टा मारने वालों की नहीं चलेगी, एक गलती पर शून्य अंक तय

CBSE ने बोर्ड परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार करते हुए साफ कर दिया है कि अब सिर्फ रट्टा मारकर परीक्षा पास करने का दौर खत्म हो चुका है। नए नियमों के तहत छात्रों को अब विषयों की गहरी समझ और वास्तविक जीवन में उनके उपयोग की जानकारी होना जरूरी होगा।

CBSE द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, आगामी परीक्षाओं में आधे से ज्यादा सवाल कॉन्सेप्ट और एप्लीकेशन बेस्ड होंगे। इससे छात्रों की सोचने, समझने और विश्लेषण करने की क्षमता को परखा जाएगा।

वहीं, बोर्ड ने मूल्यांकन प्रणाली को भी सख्त बना दिया है। यदि छात्र साइंस या सोशल साइंस पेपर में उत्तर सही सेक्शन में नहीं लिखता है, तो उस उत्तर को जांचा नहीं जाएगा और छात्र को 0 नंबर दिए जाएंगे। बोर्ड का कहना है कि यह नियम अनुशासन और स्पष्टता बनाए रखने के लिए जरूरी है।

छात्रों के तनाव को कम करने के उद्देश्य से CBSE ने यह भी घोषणा की है कि कक्षा 10वीं के छात्र साल में दो बार बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे। दोनों परीक्षाओं में से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को ही अंतिम परिणाम माना जाएगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव छात्रों के भविष्य को बेहतर दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

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